sabd hi mere zajbat hai......

aur inhi zajbat me mera byaktitut chupa hai...

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ziawaris


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सच में आरक्छण का असली हक़दार कौन.

Posted On: 26 Oct, 2016  
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Career Hindi News Social Issues में

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हर गम में मुस्कुराना सीखो ,,,,,,,,,,,,,,,,,

Posted On: 24 Oct, 2013  
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Junction Forum Others lifestyle कविता में

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बढती हुई महगाई का कोन जिम्मेदार

Posted On: 25 Sep, 2012  
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भारत के विकास के रूप अनेक…………….

Posted On: 18 Apr, 2012  
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भारत के विकास के रंग अनेक……..

Posted On: 18 Apr, 2012  
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Posted On: 27 Nov, 2011  
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महगाई के थप्पड़ की गूंज ……

Posted On: 26 Nov, 2011  
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बेचारे मोबाइल का क्या दोस है……….

Posted On: 24 Nov, 2011  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: SATYA SHEEL AGRAWAL SATYA SHEEL AGRAWAL

मान्यवर विनोद जी, सादर. हम कोई जज नहीं हैं कि औचित्य - अनौचित्य पर ही विचार करते रहें, हम इस देश के एक नागरिक भी हैं, जिस पर अपने परिवार के पालन-पोषण कि जिम्मेदारी भी होती है. इस जिम्मेदारी को निभाने में आज कि भ्रस्ट व्यवस्था और महंगाई सबसे बड़ी बाधा है. इससे न आप इनकार कर सकते हैं न हम. और इस चक्की का निर्माण इन्ही राजनेताओं ने किया है, जिसमे हम पिस रहे हैं. पंडित रमेश जी ने एक जगह लिखा है उसे उद्धृत कर रहा हूँ --- बाबा रामदेव पर लाठिया बरसाई गयी, कभी प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने फोन कर के एक बार भी उनसे खैर नहीं पूछा. अरविंद केजरीवाल पर चप्पलें फेकी गयी कभी उन्हें इसकी निंदा करने क़ी चेत नहीं आई. लेकिन आज शरद पवार को किसी ने चाटा मारा तो पूरी संसद ही हाल चाल पूछने में लग गयी. अरे थप्पड़ ही तो मारा, देश क़ी अस्मिता, संप्रभुता, अर्थव्यवस्था या स्वाभिमान को तो नहीं रौंदा? जैसा कि अब्दुल मजीद डार, मुफ्ती मुहम्मद सईद, लोन एवं गनी काशमीर को भारत का अँग मानते ही नहीं. फिर भी उन्हें ससम्मान विशिष्ट अतिथि का दर्ज़ा देकर सहमति एवं रायमसविरा के लिए आमंत्रित किया जाता है. राहुल के शब्द “भिखारी” पर बवाल मचाना केवल लोगो क़ी तन्मयता को भंग कर सीधे सादे लोगो क़ी सरल मानसिकता को अपने पक्ष में कर “वोट” बटोरने का पापपूर्ण एवं भोंडा षडयंत्र है. और कुछ नहीं. विचार करें, सोचें, सामजिक वर्ग और राजनीतिक वर्ग---- इन दोनों में से हम किस में आते हैं.

के द्वारा: shashibhushan1959 shashibhushan1959

शरद पवार को थप्पड़ मारना कोई बुद्धिमानी भरा कार्य नहीं है. महंगाई के लिए कोई भी सरकार ही केवल जिम्मेदार नहीं होती है बल्कि उसके लिए कई और भी कारण होते हैं. हाँ सरकारी नीतियां भी कारण हैं मगर मैं यह पूछना चाहता हूँ की इसके लिए क्या केवल कांग्रेस ही जिम्मेदार है? इंदिरा गाँधी के बाद जब काग्रेस धीरे धीरे पतन की और बढ़ी और अन्य पार्टियों को लोगों ने मौका दिया तब उन्होंने क्या किया ? किसी ने बी.जे.पी. , या अन्य पार्टी के नेताओं को क्यों नहीं मारा. मेरी समझ में यह नहीं आता की सभी लोग केवल कांग्रेस को ही क्यों दोषी मानते हैं. बाबा रामदेव, अन्ना हजारे , स्वामी अग्निवेश, किरण बेदी आदि ने इसके पहले क्यों नहीं आवाज उठाई? किरण बेदी तो पुलिस कमिश्नर थीं कांग्रेस के ज़माने में तब उन्होंने पुलिस विभाग में हो रही वर्षों से चली आ रही भ्रष्टाचार को क्यों नहीं मिटा सकीं? क्या इस काम के लिए उन्हें अन्ना की ज़रूरत थी? या इसलिए कदम नहीं उठाया था की उस समय उन्हें अपनी नौकरी प्यारी थी?

के द्वारा:

दिखिए बात आप की बहोत दुरुस्त है बड़े का सम्मान लोग ऊँची ही नज़र  से करते है किया करे अब यहाँ जब छोटे राज्ये की बात आ जाती है तो लोग सिर्फ इस बात की तरफ ध्यान  देते है की बट्बारा होना चाहिए पर इज्ज़त और सम्मान भूल जाते है पर सायद उप के दो तुक्धे तो होना चाहिए  जो समय की मांग है और वोह टुकड़ा बुन्धेल्खंड के रूप में होना चाहिए क्युके वह के लोग गरीबी और लाचारी से तबाह है किसान परेसान है और कोई सुनने वाला नहीं अगर उसे अलग कर दिया जाये तो वह विकास में गति प् सकता है जोकि उप के लिए भी बेहतर होगा बाल ठाकरे  पैदा होने इसका कोई लेना देना नहीं क्युके सम्मानित व प्रतिचित ब्यक्ति से हर कोई जलता है

के द्वारा:

आप लोग महाराष्ट्र को कैसे दोष दे सकते हो, अलगाववाद तो आप लोगों में कुट कुट के भरा है । क्या उत्तर प्रदेश खेत है ? मायावती बुढ्ढी हो गई है जो ईस खेत को चार हिस्से कर के बांटना चाहती है, अपने अनजान वारिसों को ? नही, वो उत्तर प्रदेश की जनता को ही बांटना चाहती है । उसे मालुम हो गया है पूरे प्रदेश में उसका जादू अब चलनेवाला नही है । वो समजौता करना चाहती है । एक टुकडा कोंग्रेस को देना चाहती है, एक मुलायम को, एक अमरसिंह और एक अपने पास रखना चाहती है, हमेशां के लिये, वहां के लोगों का खून पीने के लिए । भाई मेरे विकास नये उद्योग और कारखाने डालने से होता है । राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधायकों की फौज बनाने से नही होता । सिर्फ इन सब महाराजाओं का खरचा ही बढता नही है और भी बहुत चीजें बनानी पडती है । लोग राष्ट्रियता की दुहाई देते हैं । कश्मिर की बाता आती है तब राष्ट्रियता जाग जाती है । अंदरूनी तुट-फुट किसीको दिखाई नही देती । भारत का नागरिक बनना किसी को पसंद नही छोटे छोटे राज्यों में कैद हो जाना पसंद है । आप लोग उत्तर प्रदेश के विस्तार की और आबादी की ताकत नही जानते । आज उत्तर प्रदेश बडा है ईस लिये सब भाव देते हैं । टुकडों में बंट जाओगे तो कोइ देखेगा भी नही कौनसा टुकडा किधर गया । मुंबई का राज ठाकरे तो पिछे हट जायेगा आप खूद चारों टुकडों में अनेक राज ठाकरे पैदा कर लोगे ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

उत्तर प्रदेश का बटवारा होना जरुरी है.वर्ना पूर्वांचल के नेता पशिमी उतर प्रदेश के राजस्व को खा जायेंगे,कुल प्रदेश के राजस्व में प.उ.प्र.का हिस्सा सबसे जादा होता है, उससे कम अवध का, उससे कम पूर्वांचल का और सबसे कम बुन्देल खंड का! सरकार जिलो तक और लोग सरकार तक जल्दी पहुचेंगे.निगरानी, जाँच और सुनवाई जल्दी होगी! बसपा का पुरे राज्य में जनाधार है पर सपा का केवल दबंग और पूर्वांचल छेत्रो में ही कुछ जनाधार है, सो सपा नहीं चाहती की बटवारा हो.लुटेरो के गाव में क्या लूटोगे! भाजपा और कांग्रेस को पूरा साथ देना चाहिए एक राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते व्यापक सोच होनी चाहिए, सपा की तरह संकुचित नहीं! श्री व्रन्दावन बांके बिहारी जी का प्रसाद घर पर मगाने के लिए मेल करैं.-brajsarang@gmail.com

के द्वारा:




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